आधुनिक शिक्षा के साथ हमें प्राचीन पद्धतियों का अनुसरण करना चाहिए- डॉ आई पी प्रजापति

मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार शासकीय महाविद्यालय मड़वास में भारतीय ज्ञान परंपरा के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर भारतीय भाषाएं एवं भारतीय ज्ञान परंपरा विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन करके की गई।
संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन हिन्दी विभाग की डॉ. निशा सिंह ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बघेली भाषा के आंचलिक कवि श्री रावेंद्र शुक्ला उपस्थित थे। इस अवसर पर उन्होंने मातृभाषा की उपादेयता पर अपनी बात रखी और बघेली पर कविता प्रस्तुत की। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में आंचलिक साहित्यकार डॉ. संतोष तिवारी उपस्थित थे । उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और भारतीय भाषा को जोड़ते हुए अपनी बात कही। कार्यक्रम में सह वक्ता के रूप में हिन्दी के शोध विद्यार्थी श्री निखिल कुमार उपस्थित थे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षक श्री के.के.मिश्र उपस्थित थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता और स्वागत भाषण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आई.पी.प्रजापति ने की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ हमे प्राचीन पद्धतियों का अनुसरण करना चाहिये। कार्यक्रम का संचालन भारतीय ज्ञान परंपरा की सहायक नोडल अधिकारी डॉ. आकांक्षा मिश्रा ने किया। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन भारतीय ज्ञान परंपरा के नोडल अधिकारी डॉ. दीपक अग्निहोत्री ने किया।
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर महाविद्यालय में तकनीकी युग मे मातृभाषा का अस्तित्व एवं चुनौतियाँ विषय पर निबंध प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। इस निबंध प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर कुमारी रूबी साहू द्वितीय स्थान पर रिया केवट एवं तृतीय स्थान पर सावित्री विश्वकर्मा थी।
कार्यक्रम में डॉ. संगीता मिश्रा डॉ. सौरभी गुप्ता डॉ ज्योति रजक डॉ पूजा गर्ग डॉ कमलेश जायसवाल डॉ सुरेंद्र गुप्ता डॉ राजेश पटेल डॉ पंकज मिश्रा डॉ अनुराग तिवारी डॉ संध्या वर्मा डॉ रामधारी जायसवाल प्रो. प्रवीण कुमार प्रो. बाबा हरिनन्द श्री अनिल केवट सहित महाविद्यालय के छात्र/छात्राए उपस्थित थे।

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